भारतीय रेलवे क्लॉक रूम नियम: सामान रखने की गाइड

रेलवे स्टेशन पर सामान जमा करने को लेकर असमंजस में हैं? जानें भारतीय रेलवे क्लॉक रूम के नवीनतम नियम, शुल्क, लॉकर की कीमतें और सामान सुरक्षित रखने के तरीके।

27 Jun 2026अद्यतन 27 Jun 20268 मिनट पठनtrain bookingirctccloak roomluggage storage

TL;DR

हां, आप अपना सामान किसी भी बड़े भारतीय रेलवे स्टेशन के क्लॉक रूम या ऑटोमैटिक लॉकर में 30 दिनों तक के लिए छोड़ सकते हैं। लेकिन एक शर्त है: आपके सभी बैगों पर ताला लगा होना चाहिए, और आपके पास एक वैध ट्रेन टिकट या प्लेटफॉर्म टिकट होना चाहिए। इसका दैनिक शुल्क ₹20 से ₹100 प्रति बैग तक होता है।


भारतीय रेलवे के क्लॉक रूम में सामान रखने के नियम क्या हैं?

भारतीय रेलवे के क्लॉक रूम में सामान रखने के लिए, आपके बैग सुरक्षित रूप से बंद (locked) होने चाहिए, और आपके पास एक वैध ट्रेन टिकट या प्लेटफॉर्म टिकट होना चाहिए। सामान को अधिकतम 30 दिनों तक रखा जा सकता है। हालांकि, जमा किए गए बैग में कीमती सामान, नकद या भोजन न रखें।

यदि आप अपना सामान स्टेशन पर छोड़ने की योजना बना रहे हैं, तो एक सुनहरा नियम है जिसे आप बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं कर सकते: आपके बैगों पर ताला लगा होना चाहिए। मैंने कई यात्रियों को क्लॉक रूम के काउंटर से केवल इसलिए वापस लौटते देखा है क्योंकि उनके पास बिना ताले का बैकपैक या खुली ज़िप वाला हैंडबैग था। स्टाफ उसे स्वीकार नहीं करेगा। चोरी को रोकने और सामान को सुरक्षित रखने के लिए यह एक सख्त सुरक्षा उपाय है, इसलिए स्टेशन जाने से पहले एक छोटा ताला जरूर खरीद लें।

अपना सामान जमा करने के लिए, आपको यात्रा का प्रमाण दिखाना होगा। एक कन्फर्म टिकट, आरएसी (RAC) टिकट, या यहां तक कि प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) का टिकट भी इसके लिए मान्य होगा। आप जानते ही होंगे कि रेलवे में WL full form is Waiting List (प्रतीक्षा सूची)। रेलवे बुकिंग प्रणाली में, आपकी रिजर्वेशन स्थिति इस क्रम में आगे बढ़ती है: WL (Waiting List) → RAC (Reservation Against Cancellation) → Confirmed

अब, यदि आपने ऑनलाइन ई-टिकट बुक किया है और वह वेटिंग लिस्ट में ही रह जाता है—उदाहरण के लिए, WL/10 से शुरू होकर चार्ट तैयार होने तक केवल WL/1 तक ही पहुंच पाता है—तो सिस्टम इसे स्वचालित रूप से रद्द कर देगा और आपका पैसा वापस कर देगा। ऐसी स्थिति में आप इसका उपयोग नहीं कर सकते क्योंकि यह टिकट अब वैध नहीं है। हालांकि, भौतिक काउंटर वेटिंग टिकट (जो स्वचालित रूप से रद्द नहीं होते) या एक साधारण प्लेटफॉर्म टिकट क्लॉक रूम में सामान जमा करने के लिए बिल्कुल सही हैं। बस यह सुनिश्चित करें कि आप अपने बैग में नकदी, लैपटॉप या महंगे गहने न छोड़ें, क्योंकि रेलवे खोए हुए कीमती सामान की जिम्मेदारी नहीं लेता है।


भारतीय रेलवे क्लॉक रूम और लॉकर का शुल्क कितना है?

पारंपरिक भारतीय रेलवे क्लॉक रूम में प्रति बैग हर 24 घंटे के ब्लॉक के लिए ₹20 से ₹100 का शुल्क लिया जाता है, जो स्टेशन की श्रेणी पर निर्भर करता है। ऑटोमैटिक स्मार्ट लॉकर में प्रति घंटे या समय-ब्लॉक के हिसाब से शुल्क लिया जाता है, जो लॉकर के आकार के आधार पर आमतौर पर ₹30 से ₹75 से शुरू होता है।

आपके द्वारा भुगतान की जाने वाली कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि आप पारंपरिक क्लॉक रूम का उपयोग कर रहे हैं या आधुनिक स्मार्ट लॉकर का। पारंपरिक क्लॉक रूम सीधे रेलवे स्टेशन द्वारा चलाए जाते हैं, और डिवीजनल रेलवे मैनेजर (DRM) स्थानीय मांग के आधार पर दरें तय करते हैं। इसका मतलब है कि नई दिल्ली, हावड़ा, या मुंबई CSMT जैसे बड़े टर्मिनलों पर सामान रखने का शुल्क छोटे स्टेशनों की तुलना में थोड़ा अधिक होगा।

कई आधुनिक स्टेशनों पर, अब आपको डिजिटल स्मार्ट लॉकर मिलेंगे (जो अक्सर निजी भागीदारों द्वारा संचालित होते हैं)। ये बहुत अच्छे हैं क्योंकि इनमें आपको लंबी कतारों में इंतजार नहीं करना पड़ता है। फ्लैट 24 घंटे के शुल्क के बजाय, स्मार्ट लॉकर आपको 3, 6, या 12 घंटे के लिए स्लॉट किराए पर लेने की सुविधा देते हैं। लॉकर के आकार (स्मॉल, मीडियम, या लार्ज) के हिसाब से कीमत बढ़ जाती है।

यहाँ शुल्कों का एक संक्षिप्त विवरण दिया गया है:

सामान रखने का विकल्पपहले 24 घंटे का शुल्कहर अगले 24 घंटे का शुल्कमुख्य नियम और विशेषताएं
पारंपरिक क्लॉक रूम₹20 - ₹50 प्रति बैग₹25 - ₹80 प्रति बैगरेलवे द्वारा संचालित; ताला होना अनिवार्य
स्मार्ट लॉकर (स्मॉल)₹30 - ₹50 (समय स्लॉट)₹40 - ₹60OTP/PIN एक्सेस; छोटे बैग के लिए उपयुक्त
स्मार्ट लॉकर (मीडियम)₹50 - ₹75 (समय स्लॉट)₹60 - ₹80मानक आकार के सूटकेस के लिए उपयुक्त
स्मार्ट लॉकर (लार्ज)₹80 - ₹120 (समय स्लॉट)₹100 - ₹150बड़े रक्सैक या कई सामानों के लिए उपयुक्त

स्टेशन क्लॉक रूम का उपयोग कैसे करें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड?

स्टेशन क्लॉक रूम का उपयोग करने के लिए, अपने बैग पर ताला लगाएं, क्लॉक रूम कार्यालय का पता लगाएं, अपना ट्रेन टिकट और फोटो आईडी दिखाएं, विवरण फॉर्म भरें और रसीद प्राप्त करें। सामान वापस लेते समय रसीद दिखाकर निर्धारित शुल्क का भुगतान करें।

स्टेशन पर अपना सामान जमा करना काफी आसान है यदि आप सही चरणों का पालन करते हैं। सबसे पहले, एक छोटा ताला लें और अपने बैग की हर ज़िप को बंद कर दें। इसके बाद, "क्लॉक रूम" या "लेफ्ट लगेज ऑफिस" के बोर्ड देखें—ये आमतौर पर मुख्य प्रवेश द्वार या प्लेटफॉर्म 1 के पास होते हैं।

क्लर्क को अपना टिकट और एक सरकारी फोटो आईडी (जैसे आधार कार्ड, पासपोर्ट, या पैन कार्ड) सौंपें। वे आपको यात्रा का विवरण, घर का पता और सामान का विवरण लिखने के लिए एक छोटा सा फॉर्म देंगे। फॉर्म वापस करने पर, वे आपके सामान पर एक स्टिकर चिपका देंगे और आपको रसीद की एक प्रति सौंपेंगे। इस रसीद को खोने न दें! यदि आप इसे खो देते हैं, तो सामान वापस पाने के लिए स्टेशन मास्टर को आवेदन लिखना, स्वामित्व साबित करना, जुर्माना देना और एक क्षतिपूर्ति बांड (indemnity bond) पर हस्ताक्षर करना होगा।


क्या आप क्लॉक रूम के लिए करंट अवेलेबल टिकट का उपयोग कर सकते हैं?

हाँ, आप क्लॉक रूम में सामान रखने के लिए करंट अवेलेबल टिकट का उपयोग कर सकते हैं। करंट अवेलेबल टिकट वास्तव में एक पूर्ण रूप से कन्फर्म सीट (fully confirmed seat) होती है, जिसमें कोच और बर्थ नंबर होते हैं। यह प्रस्थान से 4 घंटे पहले खुलती है और 30 मिनट पहले बंद होती है।

क्या होगा यदि आप अभी किसी शहर में पहुंचे हैं, दिन भर घूमना चाहते हैं, लेकिन आपके पास पहले से बुक की गई ट्रेन टिकट नहीं है? आप बुकिंग काउंटर या ऑनलाइन से एक current available ticket खरीद सकते हैं। यह एक fully confirmed seat होती है जो कोच और बर्थ नंबर के साथ आती है। इन टिकटों की बुकिंग ट्रेन छूटने से ठीक 4 घंटे पहले (पहला रिजर्वेशन चार्ट तैयार होने के ठीक बाद) खुलती है और प्रस्थान से 30 मिनट पहले बंद होती है।

चूंकि यह एक वैध यात्रा टिकट है, इसलिए क्लॉक रूम स्टाफ इसे सहर्ष स्वीकार कर लेगा। आप अपना करंट अवेलेबल टिकट दिखा सकते हैं, अपना भारी सामान जमा कर सकते हैं और बिना किसी बोझ के शहर घूम सकते हैं।

यदि आपको अपनी बुकिंग की स्थिति या कन्फर्म होने की संभावना की जांच करनी है, तो आप LastBerth पर जाकर तुरंत PNR Status सर्च कर सकते हैं। यह आपको सीट कन्फर्म होने की संभावना दिखाता है और अन्य विकल्प भी देता है। यदि आपकी टिकट कन्फर्म होने की संभावना कम है, तो Finding Smart Seats सुविधा बहुत उपयोगी है—यह यात्रा को अलग-अलग सेगमेंट में विभाजित करके आपको कन्फर्म सीट दिलाने में मदद करती है। इसके अलावा, यदि आप पहले से ही ट्रेन में हैं और खाली बर्थ देखना चाहते हैं, तो Seat Status Coach Journey Lookup आपको यह दिखाता है कि आपके मार्ग पर किन स्टेशनों के बीच कौन सी सीटें खाली हैं।


क्लॉक रूम और सामान रखने से जुड़े सामान्य सवाल (FAQ)

क्या मैं बिना ताले के बैग को रेलवे क्लॉक रूम में रख सकता हूँ?

नहीं, यदि आपके बैग पर ताला नहीं लगा है, तो रेलवे कर्मचारी उसे तुरंत अस्वीकार कर देंगे। चोरी रोकने के लिए हर बैग, सूटकेस या बैकपैक के ज़िप पर एक भौतिक ताला होना अनिवार्य है।

क्लॉक रूम में सामान रखने के लिए मुझे कौन से दस्तावेज दिखाने होंगे?

आपको एक वैध यात्रा टिकट (कन्फर्म, आरएसी, वेटिंग लिस्ट या करंट अवेलेबल टिकट) या प्लेटफॉर्म टिकट दिखाना होगा। इसके साथ ही आपको आधार, पासपोर्ट, वोटर आईडी या पैन कार्ड जैसी सरकारी फोटो आईडी भी दिखानी होगी।

यदि मेरी क्लॉक रूम की रसीद खो जाए तो मुझे क्या करना चाहिए?

रसीद खो जाने पर आपको तुरंत सामान वापस नहीं मिल सकता। आपको स्टेशन मास्टर को एक आधिकारिक आवेदन लिखना होगा, अपनी आईडी की कॉपी जमा करनी होगी, बैग के सामान का विवरण देकर स्वामित्व साबित करना होगा, जुर्माना भरना होगा और एक क्षतिपूर्ति बांड पर हस्ताक्षर करने होंगे।

मैं स्टेशन के क्लॉक रूम में अपना सामान कितने समय तक रख सकता हूँ?

आप अपना सामान अधिकतम 30 दिनों तक रख सकते हैं। यदि आप 30 दिनों के भीतर अपना सामान वापस नहीं लेते हैं, तो रेलवे इसे लावारिस संपत्ति मानकर क्लॉक रूम के बकाए शुल्क की वसूली के लिए सार्वजनिक नीलामी में बेच सकता है।

रेलवे बुकिंग में WL का फुल फॉर्म क्या होता है?

WL का full form Waiting List (प्रतीक्षा सूची) होता है। इसका मतलब है कि आपकी टिकट अभी कन्फर्म नहीं है और आप कतार में हैं। यदि ट्रेन प्रस्थान से पहले यह आरएसी या कन्फर्म में नहीं बदलती है, तो ई-टिकट स्वचालित रूप से रद्द हो जाता है और रिफंड आ जाता है।

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Kartik Arora

Railway Travel Expert • 500+ Journeys

Kartik is a passionate Indian Railways traveler who has spent years decoding the complex algorithms behind IRCTC waitlists, Tatkal quotas, and chart preparation. He built LastBerth to help fellow travelers find confirmed tickets when all hope seems lost.

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